*सामान्य ज्ञान ग्रुप*
*15 अगस्त 1947 के सम्बंध में स्पेशल पोस्ट*
*15 अगस्त 1947 के सम्बंध में स्पेशल पोस्ट*
*आजादी एक पवित्र शब्द है, एक पुनीत अहसास है, जो लाखों वीरों के जीवन-बलिदान के फलस्वरूप प्राप्त हुआ हैं । आजादी का यह स्वर्णिम अवसर हमारे ह्रदय को देशभक्ति के जज्बे से ओतप्रोत कर देता है |*
*स्वतंत्रता मनुष्य की स्वाभिविक वृत्ति है | अधम से अधम व्यक्ति और छोटे से छोटा बालक भी अपने ऊपर किसी का नियंत्रण प्रसन्नता से स्वीकार नहीं करता | अंग्रेज भारत में आये और भारतियों को परतंत्रता के पाश में जकड़ लिया | गुलामी की जंजीरों में बंधे हुए भारतीय उसी दिन से उस जाल को काटने के लिए अनवरत प्रयास करते रहे।*
*इस पुनीत स्वतंत्रता संग्राम का श्रीगणेश झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के कर-कमलों से सन 1775 में हुआ | तत्कालीन परिस्थितियों में अंग्रेजों ने फूट डालो और शासन करो की नीति अपनाकर न केवल भारत में अपने पैर जमा रखे थे बल्कि उन्होंने भारतियों को लूटने और उनपर अत्याचार करने में किसी प्रकार की कमी नहीं रखी थी |अपने शासनकाल में अंग्रेजों ने इस देश को जर्जर तथा खोखला बना दिया। यहाँ के लोग उनके अत्याचार तथा शोषण के शिकार होते रहे।*
*इन अत्याचारों से स्वतंत्रता पाने की भारतियों की लालशा धीरे – धीरे जोर पकड़ती गयी जिसके परिणामस्वरूप 1857 ई. में यह प्रथम स्वधीनता संग्राम का भीषण रूप लेकर फूट पड़ा | यदि कुछ गलतियाँ न हुई होती तो हमारा देश 1857 में ही आजाद हो गया होता | 1857 के संघर्ष को और उस संघर्ष में अपने प्राणों का बलिदान देने वाले देशभक्तों को भूलाया नहीं जा सकता |*
*इसलिए जब हमें 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली, तब हमने स्वतंत्रता के वास्तविक महत्व को महसूस किया और जब भारत स्वतंत्रत हुआ तब हमने स्वतंत्रता दिवस के इस ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण दिन को हर साल “स्वतंत्रता दिवस” के रूप में मनाने लगे।*
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