*सामान्य ज्ञान ग्रुप*
*15 अगस्त 1947 के सम्बंध में स्पेशल पोस्ट*
*15 अगस्त 1947 के सम्बंध में स्पेशल पोस्ट*
*स्वतंत्रता दिवस का इतिहास-*
*यह तो ज्ञात हो ही चुका है कि15 August स्वतंत्रता दिवस से जुड़ी पृष्ठभूमि के वीरतापूर्ण इतिहास का श्रीगणेश 1775 की प्लासी की लड़ाई से ही प्रारम्भ हो गया था |
इतिहास साक्षी है कि इस स्वाधीनता संग्राम में झांसी की रानी, तांत्या टोपे, नाना साहब, मंगल पाण्डे, अहमदशाह आदि देश प्रेमियों ने अंग्रेजों के विरुद्ध डटकर युद्ध किया | किन्तु क्रान्ति समय पूर्व होने के कारण स्वतंत्रता नहीं मिल सकी | लेकिन देशभक्तों ने इससे एक बड़ा सबक जरुर लिया कि हमें योजनाबद्ध ढंग से संगठित होकर अंग्रेजों से मुकाबला करना होगा | उन्होंने इस नीति के खिलाफ एकजुट होकर अपनी एकता का परिचय आन्दोलन के रूप में देना प्रारम्भ किया |*
*1885 ई. में कांग्रेस की स्थापना के साथ एक बार पुनः स्वतंत्रता संग्राम की क्रांति अहिंसात्मक आन्दोलन के रूप में आरम्भ हो गई | इस स्वतंत्रता संग्राम आन्दोलन से देश की सुषुप्त जनता जाग उठी | कांग्रेस की नीति प्रारंभ में उदार रही | उदारवादी नेताओं में दादाभाई नारौजी, फिरोजशाह, गोखले, सुरेन्द्रनाथ बनर्जी प्रमुख थे | ये लोग अपनी मांग मनवाने हेतु अंग्रेजों से प्रार्थना करते और अपने शिष्ट मण्डल भेजते |*
*आगे चलकर कांग्रेस में दो दल बन गए | एक नरम दल और दूसरा गरम दल | गरम दल के नेता बाल गंगाधर तिलक ने स्वतंत्रता के लिए शंखनाद किया कि “स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा |” गणेशोत्सव के माध्यम से उन्होंने स्वतंत्रता आन्दोलन में जान फूंक दी और सम्पूर्ण देश को एक सूत्र में बांध दिया | स्वतंत्रता को पाने के लिए सहस्त्रों ने अपने को उत्सर्ग कर दिया |*
*1920 में गांधीजी जी द्वारा असहयोग आन्दोलन चलाया गया जिसमें लाखो लोगों को जेल में ठूस दिया गया | इस आन्दोलन में नौजवानों ने बढ़ – चढ़ कर हिस्सा लिया | प. जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और राजेंद्र प्रसाद जैसे देश भक्त हिदुस्तान को ब्रिटिश शासन से आजाद कराने के लिए राष्ट्रीय क्रांति के रंगमंच पर उतर गये |*
*31 दिसम्बर 1929 की रात को 12 बजे लाहौर में रावी नदी के किनारे हुए अधिवेशन ने क्रांति की ज्वाला को और भी तीव्र कर दिया जब इस अधिवेशन में राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा कर दी, और रात को ही जुलूस निकालकर अधिवेशन स्थल लाजपत नगर का झण्डा फहरा दिया |*
*लाहौर अधिवेशन में यह भी घोषणा कर दी गई कि, प्रतिवर्ष 26 जनवरी को पूर्ण स्वराज्य की घोषणा को दोहराया जायेगा | घोषणा के बाद अग्रेजों का भारतियों के प्रति रूप और विध्वंसक हो गया | उन्होंने क्रांतिकारी भारतियों को रोकने के लिए दमन चक्र चलाया लेकिन देश के रणबांकुरो ने आजादी की लड़ाई लड़ते हुए अगले वर्ष 16 जनवरी 1930 में उसी पूर्ण स्वराज्य की घोषणा के तहत दिल्ली के कंपनी बाग़ में पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया |*
*पहले स्वतंत्रता दिवस पर प्रात: आठ बजे मौलाना आरिफ द्वारा झण्डा फहराने के बाद बहन सत्यवती, श्रीमती सोलादत्त एवं श्रीमती कौशल्या देवी ने केसरिया साड़ी पहनकर राष्ट्रीय गीत वंदेमातरम् गाया | डॉ. अंसारी ने प्रतिज्ञा पत्र दोहराया | तिरंगा हाथ में लेकर एक विशाल जुलूस निकाला गया और जनसभा की गई | इसके बाद प्रतिवर्ष 26 जनवरी को Independence Day के रूप में मनाया जाने लगा और देश की आजादी के बाद स्वतंत्रता दिवस 15 August को मनाया जाने लगा |*
*इसी दौरान दूसरे विश्व युद्ध की शुरुआत हो गई | दूसरे विश्व युद्ध के आरम्भ होने पर अगेंजी सरकार ने अपनी ओर से ही भारत के महायुद्ध में सम्मिलित होने की घोषणा कर दी, और भारतियों से पूछा तक नहीं | जब कांग्रेस ने अंग्रेज सरकार से भारतीय स्वतंत्रता के ध्येय को स्वीकार करने के लिए लिए कहा तो कोई भी संतोषप्रद उत्तर नहीं प्राप्त हुआ |*
*गांधी जी के सफल नेतृत्व में व्यक्तिगत अवज्ञा – आन्दोलन चलाया गया | इस स्वतंत्रता आन्दोलन में देश के अनेकानेक नर – नारियों ने सहर्ष सक्रिय भाग लिया | लेकिन अब तक दूसरे महायुद्ध का खतरा बढ़ते हुए, भारत की पूर्वी सीमा तक पहुंच चुका था |*
*गांधी जी को धीरे – धीरे यह विश्वास हो गया था कि अंग्रेजों के इस देश में रहने से भारतीय समस्याओं की जटिलता कम नहीं हो सकती | उन्होंने कहा कि “भारत और ब्रिटेन की रक्षा इसी में है कि अग्रेंज ठीक समय में भारत से अनुशासित ढंग से हट जायं” और इसी दृष्टि से ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ का प्रस्ताव लोगों के समक्ष रखा |*
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